Sunday, November 13, 2011

अहसास

हवा का अहसास ही अलग होता है,

न जाने क्यों हर समय अलग होता है.

कभी सुख तो कभी दुःख को लती है,

न जाने क्यों यह समय के साथ बदल जाती है.

हवा का आदमी पर जो यह रंग चढा है ,

जवानी के जोश मैं न जाने क्या भूल गया है.

न याद रहते हैं उसको रिश्ते -नाते ,बड़े -छोटे,

लेकिन हवा उसको यह सब याद दिलाती है.

वक़्त मेरा भे अच्छा आएगा यह मान कर चला चल,

शायद हवा यही अहसास दिलाती है.

भीड़ मैं रुकने से जिंदगी रुक जायेगी,

कुछ और आगे तो निकल देख हवा बदल जायेगी.

प्यार

प्यार का रूप शायद यही है,

जीने की तमन्ना,दिल की ख़ुशी,

साँसों का चलना ,खून का दौड़ना,

 शायद यही

पर क्या दर्द ,आसूं भी  मिलते हैं ,

यह सब सोचा ना था

हाँ, इसलिए अब यह पराया सा लगने लगा है,

और पराई चीज़ से शायद ही लगाव हो यही समझकर प्यार को छोड़ दिया

और

अपनाली है नफरत

क्यूंकि नफरत मैं जीत और हार

आंसूं और दर्द सब तो है.

जीने के लिए शायद यह अब हमारी आदत मैं है.