Tuesday, June 17, 2014

प्यार मैं

प्यार  की  आबरू  को उछालते  देखा है ,

इसको  सस्ते मैं बिकते  देखा  है। 

ना  जाने क्यों सचाई  नहीं  होती है  इसमें ,

ना  जाने कितने  मासूमों  को  छलते  देखा  है। 

प्यार  मैं  होते हैं  कई  गिले - शिक़वे ,

हमने इसे  नफरत  मैं  बदलते  देखा  है। 

सुना  है  उसके  हाथों  मैं बहुत बरकत  है ,

ना  जाने कितनों  की  तकदीर  बदलते  देखा  है। 


शशांक --- ११ / ०४ / २००६ 

प्यार का रूप

प्यार का रूप  शायद यही है,

जीने की तमन्ना , दिल की ख़ुशी ,

सांसो  का  चलना , खून  का दौड़ना 

हाँ  शायद  यही 

पर  क्या दर्द  , आँसू  भी मिलते हैं 

यह सब सोचा  ना  था। 

हाँ , इसीलिये अब  यह पराया  सा  लगने  लगा  है। 

और पराई  चीज़  से  शायद  ही  लगाव  हो , यही  सोच कर  प्यार  को छोड़  दिया 

और 

अपना  ली है नफरत 

हाँ 

क्योंकि नफरत  मैं  जीत  और हार  ,
आँसूं  और दर्द  सब  तो है,

जीने  के  लिए 

शायद  यह  अब  हमारी  आदत  मैं  है. ।


शशांक ---- २५ /०१/२००६ 

Sunday, February 10, 2013

तेरे बिना

आज ना जाने क्यूँ यह अहसास होता है,

जीवन कभी दूर तो कभी पास होता है।।

मैंने ख्वाब मैं कई बार उसे अपने पास देखा है ,

पर आँख खुलते ही दूरियों का अहसास होता है।।

तेरे बारे मैं तो अक्सर ही सोचता हूँ  मेरे हमसफ़र,

पर तू पास रहकर भी दूर क्यों हो जाता है।।

मिटा लो यह गिले शिकवे अपने दिल से अभी,

वक़्त को करवट बदलते देर कहाँ लगता है।।

Sunday, November 13, 2011

अहसास

हवा का अहसास ही अलग होता है,

न जाने क्यों हर समय अलग होता है.

कभी सुख तो कभी दुःख को लती है,

न जाने क्यों यह समय के साथ बदल जाती है.

हवा का आदमी पर जो यह रंग चढा है ,

जवानी के जोश मैं न जाने क्या भूल गया है.

न याद रहते हैं उसको रिश्ते -नाते ,बड़े -छोटे,

लेकिन हवा उसको यह सब याद दिलाती है.

वक़्त मेरा भे अच्छा आएगा यह मान कर चला चल,

शायद हवा यही अहसास दिलाती है.

भीड़ मैं रुकने से जिंदगी रुक जायेगी,

कुछ और आगे तो निकल देख हवा बदल जायेगी.

प्यार

प्यार का रूप शायद यही है,

जीने की तमन्ना,दिल की ख़ुशी,

साँसों का चलना ,खून का दौड़ना,

 शायद यही

पर क्या दर्द ,आसूं भी  मिलते हैं ,

यह सब सोचा ना था

हाँ, इसलिए अब यह पराया सा लगने लगा है,

और पराई चीज़ से शायद ही लगाव हो यही समझकर प्यार को छोड़ दिया

और

अपनाली है नफरत

क्यूंकि नफरत मैं जीत और हार

आंसूं और दर्द सब तो है.

जीने के लिए शायद यह अब हमारी आदत मैं है.

Tuesday, August 9, 2011

एक दौर नया

जीने का एक  दौर नया आया ,हम सबने जिसको अपनाया ,

इस दौर मैं जरा झाँक के देखें किसने कितना क्या है पाया,

एक अमीर ने पैसा पाया, गरीब ने तो सब कुछ लुटाया,

कुछ ने अपना धर्म बचाया,कुछ ने अपना झूठ छिपाया.

जीवन के इस रंग मंच पर हमने कैसा रूप अपनाया.