Tuesday, June 17, 2014

प्यार का रूप

प्यार का रूप  शायद यही है,

जीने की तमन्ना , दिल की ख़ुशी ,

सांसो  का  चलना , खून  का दौड़ना 

हाँ  शायद  यही 

पर  क्या दर्द  , आँसू  भी मिलते हैं 

यह सब सोचा  ना  था। 

हाँ , इसीलिये अब  यह पराया  सा  लगने  लगा  है। 

और पराई  चीज़  से  शायद  ही  लगाव  हो , यही  सोच कर  प्यार  को छोड़  दिया 

और 

अपना  ली है नफरत 

हाँ 

क्योंकि नफरत  मैं  जीत  और हार  ,
आँसूं  और दर्द  सब  तो है,

जीने  के  लिए 

शायद  यह  अब  हमारी  आदत  मैं  है. ।


शशांक ---- २५ /०१/२००६ 

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