तेरी याद मुझे हर पल बहुत सताती है,
शुरू तो शाम सो होती है मगर सुबह हो जाती है.
तुझे भूलने को तो भूल भी सकता हूँ मैं,
लेकिन तेरी कशिश हर बार रुला जाती है.
वो कहते है बड़ा नूर समा रखा है उसमें,
सामने जाते ही बेनूर हो जाती है.
उसकी रहमत मुझ पर भी कभी तो बरसेगी,
लेकिन किस्मत तो हर बार दगा दे जाती है.
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