मेरे घर से निकल ने के बाद आज ५ साल हो गए है ,लेकिन आज भी कुछ जाने अनजाने चहरे मुझे दिखाई पड़ते है .वो घर के पास से गुजरता हुआ लोगों के भीड़ ,खेलते हुए बच्चे ,इन सब के बीच मैं अपने आप को अकेला पाता हूँ
अपने अकेले पन मैं मुझे बस एक ही सहारा मिलता है वो मेरे माँ का साया होता है.
शायद मैं उससे मिल पाऊँ
अपने अकेले पन मैं मुझे बस एक ही सहारा मिलता है वो मेरे माँ का साया होता है.
शायद मैं उससे मिल पाऊँ
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